बिलासपुर। तुलसी जयंती के अवसर पर बिलासपुर में भक्ति, साहित्य, संगीत, काव्य और चिंतन का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जहां एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ी तुलसी गाथा का एआई संगीत संयोजन के साथ वीडियो विमोचन हुआ, भजनों की स्वर लहरियां गूंजीं, भगवान श्रीराम और गोस्वामी तुलसीदास पर केंद्रित कवि सम्मेलन सजा, साहित्यिक कृतियों का विमोचन हुआ और समाज के विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
श्री ओंकारेश्वर मंदिर सागा ले-आउट सेवा समिति, नवनीत साहित्य समिति (पुरान) एवं प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस बहुआयामी कार्यक्रम ने तुलसी जयंती को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक, पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ गोपालगंज (बिहार) के मुख्य आतिथ्य, डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता तथा न्यायमूर्ति डॉ. चंद्रभूषण वाजपेयी के अति विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ।
एआई संगीत से सजी छत्तीसगढ़ी तुलसी गाथा का विमोचन
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कवि सनत तिवारी द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ी तुलसी गाथा का वीडियो रहा। इसका संगीत संयोजन डॉ. शत्रुघन जेसवानी ने एआई तकनीक के माध्यम से किया है। अतिथियों ने वीडियो का विधिवत विमोचन किया।
इसके बाद राजकुमार पांडेय एवं साथी, मदन सिंह ठाकुर एवं साथी, राम निहोरा राजपूत तथा मनोहर दास मानिकपुरी एवं साथियों ने भजनों की संगीतमय प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सभी भजन गायकों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
राम और तुलसी पर गूंजा काव्य का स्वर
द्वितीय सत्र में भगवान श्रीराम एवं गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और विचारों पर केंद्रित कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। नगर एवं अंचल के कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति, संस्कृति और साहित्य की भावधारा प्रवाहित की।
कवि सम्मेलन वरिष्ठ कवि विजय तिवारी, अमृतलाल पाठक, बुधराम यादव, शिवशरण श्रीवास्तव, अशोक शर्मा एवं मयंक मणि दुबे के आतिथ्य में आयोजित हुआ। डॉ. राघवेंद्र दुबे, दीपक दुबे, पूर्णिमा तिवारी एवं बालमुकुंद श्रीवास ने संचालन किया। काव्य पाठ करने वाले सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
पुस्तकों का विमोचन, साहित्य और संस्कृति के साधकों का सम्मान
तृतीय सत्र में पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसका संचालन डॉ. किरण राठौर एवं कमलप्रीत कौर ने किया। पद्मश्री रामलाल बरेठ मुख्य अतिथि रहे।
इस अवसर पर एम.डी. श्रीवास्तव की कृति, ओंकारेश्वर मंदिर की वार्षिक पत्रिका तथा हेमंत गौर की कृतियों का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
सम्मान समारोह में डी.लिट. उपाधिधारी न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी, धर्मभूषण डॉ. श्रीधर गौरहा, डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. संगीता परमानंद एवं डॉ. गजेंद्र तिवारी को नवनीत मानस समिति (पुरान) द्वारा सम्मानित किया गया।
मानस विमर्श में हुई गंभीर वैचारिक चर्चा
चतुर्थ सत्र में आयोजित मानस विमर्श संगोष्ठी में रामचरितमानस और तुलसी साहित्य के विविध आयामों पर विचार मंथन किया गया। विष्णु कुमार तिवारी के संचालन में धर्मभूषण डॉ. श्रीधर गौरहा, डॉ. सत्यनारायण तिवारी, डॉ. रश्मिलता मिश्रा, मोहन शर्मा, डॉ. संगीता परमानंद, अशोक शर्मा, न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेयी, डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव एवं डॉ. अंकुर शुक्ला ने अपने विचार रखे।
पत्रकारों का भी हुआ विशेष सम्मान
कार्यक्रम के पंचम सत्र में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इनमें ऋषि सिंह परिहार (हरिभूमि), मदन सिंह ठाकुर (टारगेट ऑफ छत्तीसगढ़), वरिष्ठ पत्रकार सुरेश सिंह बैस शाश्वत, रेशमा लहरे (आज की जनधारा),उमा साहू एवं गीता सोचे (दैनिक महाकौशल) शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रदीप शर्मा ने आभार प्रदर्शन किया।
तुलसी जयंती का यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि भक्ति, आधुनिक तकनीक, छत्तीसगढ़ी संस्कृति, साहित्यिक चेतना और सामाजिक सम्मान का ऐसा मंच बना, जिसने एक ही दिन में पांच अलग-अलग रंगों से बिलासपुर की सांस्कृतिक फिजा को जीवंत कर दिया।







