सेंट्रल हिप डिसलोकेशन और एसीटैबुलम फ्रैक्चर जैसी दुर्लभ व जटिल चोट का सफल ऑपरेशन
बिलासपुर। सड़क दुर्घटना में जब किसी व्यक्ति की पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी चकनाचूर हो जाए और हिप जॉइंट अपनी जगह से खिसक जाए, तब मरीज का दोबारा सामान्य जीवन जी पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। लेकिन सिम्स बिलासपुर के चिकित्सकों ने अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक के दम पर एक ऐसे ही जटिल मामले में सफलता हासिल कर 40 वर्षीय अजय पटेल को नया जीवन दिया है।
बिल्हा क्षेत्र में 19 अप्रैल 2026 को हुई एक गंभीर सड़क दुर्घटना में अजय पटेल बुरी तरह घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल सिम्स लाया गया, जहां जांच में पता चला कि उनकी दाहिनी ओर की पेल्विस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। साथ ही हिप जॉइंट अपनी सामान्य स्थिति से हट चुका था और एसीटैबुलम (हिप सॉकेट) में गंभीर फ्रैक्चर था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह चोट ट्रॉमा सर्जरी की सबसे जटिल स्थितियों में गिनी जाती है।
ऑपरेशन थिएटर में चली कई घंटे की जंग
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ठाकुर की देखरेख में मरीज का विस्तृत परीक्षण किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. बेन के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत सर्जिकल रणनीति तैयार की।
28 अप्रैल 2026 को ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों की टीम ने अत्यंत जटिल ओपन रिडक्शन एंड इंटरनल फिक्सेशन (ORIF) सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान अत्याधुनिक सी-आर्म फ्लोरोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए हड्डियों के टूटे हुए हिस्सों को मिलीमीटर स्तर की सटीकता के साथ पुनः उनकी प्राकृतिक स्थिति में स्थापित किया गया।
विशेषज्ञों ने न केवल टूटे हुए एसीटैबुलम की मरम्मत की बल्कि अपनी जगह से खिसक चुके हिप जॉइंट को भी सफलतापूर्वक सामान्य स्थिति में स्थापित कर दिया। यह प्रक्रिया तकनीकी दृष्टि से बेहद कठिन मानी जाती है और केवल उच्च प्रशिक्षित ट्रॉमा सर्जन ही इसे सफलतापूर्वक कर पाते हैं।
फिजियोथेरेपी से लौट रही सामान्य जिंदगी
सर्जरी के बाद मरीज को विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम में शामिल किया गया। चिकित्सकों के अनुसार समय पर की गई सर्जरी और सटीक एनाटॉमिकल रिडक्शन के कारण मरीज के भविष्य में सामान्य रूप से चलने-फिरने की संभावनाएं काफी बेहतर हो गई हैं तथा गठिया और स्थायी विकलांगता जैसी जटिलताओं का खतरा भी कम हुआ है।
पूरी टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफल बनाने में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं नर्सिंग इंचार्ज योगेश्वरी सिस्टर एवं उनकी टीम ने ऑपरेशन पूर्व और पश्चात मरीज की देखभाल में उल्लेखनीय योगदान दिया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह और अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने आवश्यक संसाधनों एवं विशेषज्ञ सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर उपचार प्रक्रिया को सुचारू बनाया।
सिम्स बना जटिल ट्रॉमा सर्जरी का भरोसेमंद केंद्र
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और अनुभवी चिकित्सकों की टीम के कारण सिम्स में अब पेल्विस और एसीटैबुलम जैसी जटिल चोटों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इसे संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं, टीमवर्क और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद जहां जिंदगी व्हीलचेयर तक सिमटने का खतरा था, वहीं सिम्स के डॉक्टरों की मेहनत और आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने अजय पटेल को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद दे दी है।















