आबकारी विभाग में अंदरूनी खींचतान तेज! सीनियर बाबू और अधिकारी के विवाद की चर्चाएं
आबकारी विभाग ऐसी जानकारी मीडिया से क्यों छुपाता है?
राजकिशोर नगर में तीसरे टेंडर में खुल गई दुकान, लेकिन मंगला में अब तक नहीं मिला कोई इच्छुक… आबकारी विभाग फिर करेगा टेंडर
बिलासपुर। शहर में प्रीमियम शराब दुकानों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पिछले वर्ष शासन स्तर से बिलासपुर के दो इलाकों — मंगला और राजकिशोर नगर — में प्रीमियम शराब दुकान खोलने के आदेश जारी हुए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जहां राजकिशोर नगर की दुकान तीसरे टेंडर में जाकर खुल गई, वहीं मंगला की दुकान के लिए सात बार टेंडर निकलने के बावजूद अब तक कोई भी कारोबारी सामने नहीं आया।
सूत्रों के मुताबिक आबकारी विभाग लगातार टेंडर प्रक्रिया दोहरा रहा है और अब फिर से नया टेंडर जारी करने की तैयारी में है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मंगला क्षेत्र में ऐसी कौन सी वजह है जिसके चलते कारोबारी करोड़ों के इस कारोबार में रुचि नहीं दिखा रहे?
इधर विभागीय अधिकारियों का दावा है कि कुछ शराब दुकानों को दूसरी जगह शिफ्ट कर राजस्व बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल पारदर्शिता को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि विभाग राजस्व बढ़ाने और दुकानों के स्थानांतरण जैसे बड़े फैसले ले रहा है तो इसकी अधिकृत जानकारी मीडिया और जनता से क्यों छिपाई जा रही है?
जब इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो विभागीय अधिकारियों ने जवाब दिया कि “सारी जानकारियां जनसंपर्क विभाग को भेज दी जाती हैं।” अब सवाल यह है कि यदि जानकारी जनसंपर्क विभाग को भेजी जा रही है तो फिर मीडिया तक क्यों नहीं पहुंच रही? कहीं विभाग और जनसंपर्क के बीच सूचना दबाने का खेल तो नहीं चल रहा?
शहर में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि शराब दुकानों के टेंडर, शिफ्टिंग और राजस्व बढ़ाने के नाम पर आखिर अंदरखाने क्या चल रहा है? मंगला की दुकान पर सात बार टेंडर फेल होना सामान्य मामला नहीं माना जा रहा। जानकार इसे प्रशासनिक रणनीति, लोकेशन विवाद या संभावित कारोबारी जोखिम से जोड़कर देख रहे हैं।
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग अगली बार टेंडर में सफलता हासिल कर पाता है या फिर मंगला की प्रीमियम शराब दुकान सिर्फ फाइलों में ही घूमती रह जाएगी।















