बिलासपुर की मिसाल: जब इश्क ने मजहबी दीवारें जमींदोज कर दीं

बिलासपुर। जज़्बात, तसव्वुर, तमन्ना, दीवानगी, एहतराम और नवाज़िश से सजी एक ऐसी प्रेम कहानी, जिसने समाज की मजहबी और मतलबी सरहदों को पार कर इंसानियत की नई इबारत लिख दी। यह कहानी है पुलिस सेवा के अफसर अकीक खोखर और महिला एवं बाल विकास विभाग की वरिष्ठ अधिकारी प्रीति चखियार की—जो बीते तीन दशकों से प्रेम, सम्मान और सामंजस्य की मिसाल बने हुए हैं।

 कोर्ट मैरिज से शुरू हुआ इन्द्रधनुषी सफर

साल 1996… सरकारी सेवा के दौरान रायगढ़ में पोस्टिंग के समय औपचारिक मुलाकातें कब दिल की धड़कनों में बदल गईं, पता ही नहीं चला। दोनों ने मजहबी रीति-रिवाजों से ऊपर उठकर भारतीय विवाह अधिनियम के तहत 26 दिसंबर 1996 को बिलासपुर कलेक्टोरेट में विधिसम्मत कोर्ट मैरिज की। उस वक्त बिलासपुर के तत्कालीन कलेक्टर एम.के. राउत की मौजूदगी में कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

यह प्रेम कहानी किसी फिल्मी अंत की तरह दुखांत नहीं, बल्कि सुख, विश्वास और साझी संस्कृति की जीत बन गई।

 सेवा से शौर्य तक

पुलिस सब-इंस्पेक्टर से करियर की शुरुआत करने वाले अकीक खोखर ने अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर स्टेट पुलिस सर्विस के ओहदे तक का सफर तय किया। कानून और संविधान की रक्षा का परचम लहराते हुए उन्होंने म.प्र. और छत्तीसगढ़ पुलिस में अपनी अलग पहचान बनाई।

वहीं प्रीति चखियार ने एम.पी.पी.एस.सी. के माध्यम से महिला एवं बाल विकास अधिकारी बनकर ज्वाइंट डायरेक्टर पद तक सेवाएं दीं और बाद में वालंटरी रिटायरमेंट लेकर सामाजिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

तीन धर्म, एक घर – अनोखी परवरिश

इस दंपति की बेटी अर्शी उर्फ शिमोना एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर पीजी की तैयारी में जुटी हैं, जबकि बेटा शेरान कॉमर्स ग्रेजुएशन के बाद एलएलबी कर रहे हैं।

दिलचस्प बात यह कि पिछले 27 वर्षों से घर में कार्यरत सुरमिला तिर्की परिवार का हिस्सा बन चुकी हैं। यही वजह है कि बच्चों को हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई—तीनों धर्मों की तहजीब और तालीम एक साथ मिली। घर में दीवाली भी जगमगाती है और ईद की सेवइयां भी पकती हैं।

 समाज और स्वीकार्यता पर बेबाक राय

प्रीति बताती हैं कि पुरुष प्रधान समाज में लड़कों के फैसले जल्दी स्वीकार कर लिए जाते हैं, लेकिन बेटियों के फैसलों को अपनाने में समय लगता है। खोखर परिवार ने उन्हें खुले दिल से अपनाया, जबकि मायके में धीरे-धीरे स्वीकार्यता बढ़ी है।

 “इश्क का कोई रंग नहीं होता…”

अंत में प्रीति संजीदगी से कहती हैं—

“इश्क का कोई रंग नहीं होता, लेकिन जब दो संस्कृतियाँ मिलती हैं तो जिंदगी इन्द्रधनुष की तरह सतरंगी हो जाती है। असली वेलेंटाइन डे वही है, जो हर दिन रिश्ते को सम्मान, धैर्य और स्नेह से सींचे।”

खीर हो या शीर खुरमा… मिठास दिल से होती है।
प्यार और सामंजस्य को सबसे ऊपर रखिए और कहिए—
हैप्पी वेलेंटाइन डे… टू एवरी कपल!

लेखिका

(जरीनाज अंसारी – डॉ. शगुफ्ता परवीन )

(सहयोग: सुरेंद्र वर्मा, बिलासपुर)

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