बिलासपुर की सड़कों पर पिछले कुछ महीनों से जिस तरह का खतरनाक ट्रेंड देखने को मिल रहा है, वह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सामाजिक गैर-जिम्मेदारी की पराकाष्ठा है। पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है—पाँच महीनों में 14 मामले दर्ज, 33 वाहन जब्त, 72 आरोपी गिरफ्तार। लेकिन सवाल यह है कि आखिर स्टंटबाज़ों पर यह कड़ी कार्रवाई भी असरदार क्यों नहीं हो रही?
सड़कें रेस ट्रैक नहीं हैं, और न ही खुलेआम बर्थडे सेलिब्रेशन का मंच। फिर भी कुछ युवा सोशल मीडिया की चकाचौंध और लाइक्स की दीवानगी में जान जोखिम में डालने से भी नहीं चूक रहे। ताजा मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का है, जहाँ महज 19 साल के दो युवक—उज्जवल कौशिक और निलेश उर्फ रॉकी वर्मा—ने तिफरा ओवरब्रिज को अपना “स्टंट-सेट” बना डाला। जीप के बोनट पर बैठकर खतरनाक करतब और पीछे बैठकर उसका वीडियो शूट। यह सब सिर्फ वायरल होने की चाह में।
पुलिस ने धारा 281, 3(5) BNS और 184, 189 MV Act के तहत त्वरित कार्रवाई कर दोनों को गिरफ्तार किया, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई और कोर्ट में पेश भी कर दिया गया। लेकिन असली चिंता यह है कि ऐसी घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। क्या केवल पुलिस की कार्रवाई काफी है? या समाज को भी अब आगे आना होगा?
यह महज़ कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि मानसिकता का भी सवाल है। घर-परिवार, समाज और स्कूलों को यह समझाना होगा कि “वायरल” होने की चाहत किसी की जिंदगी का अंत भी बन सकती है।
बिलासपुर पुलिस लगातार सख़्ती कर रही है और करनी भी चाहिए—पर असली सुधार तभी आएगा, जब युवा यह समझेंगे कि स्टंट सड़क पर नहीं, सुरक्षित जगहों पर होते हैं; और शोहरत लाइक्स से नहीं, जिम्मेदार नागरिक बनने से मिलती है।















