बिलासपुर: SP रजनेश सिंह ने नहीं दी DGP अरुण देव गौतम के आगमन की सूचना, पत्रकारों में गहरा आक्रोश

DGP अरुण देव गौतम ने बिलासपुर में ली समीक्षा बैठक, बेहतर पुलिसिंग हेतु दिए दिशा-निर्देश — पत्रकारों को नहीं दी गई सूचना

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने बिलासपुर जिले में पुलिस व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बेहतर पुलिसिंग के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, डिटेक्शन, विजिबल पुलिसिंग एवं सामुदायिक पुलिसिंग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। उक्त जानकारी पुलिस प्रेस विज्ञप्ति से मिली।

विज्ञप्ति के अनुसार, इस अवसर पर बिलासपुर रेंज के आईजी डॉ. संजीव शुक्ला, एसएसपी रजनेश सिंह, 2nd बटालियन कमांडेंट मनोज खिलाड़ी, जोनल एसपी दीपमाला कश्यप, रेडियो एसपी पूजा कुमार सहित जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारी उपस्थित रहे।

मिली जानकारी के अनुसार, एसएसपी रजनेश सिंह ने जिले में अपराधों पर नियंत्रण, बीट सिस्टम की मजबूती, सामुदायिक कार्यक्रम ‘चेतना अभियान’ की प्रगति और विजिबल पुलिसिंग को लेकर प्रस्तुति दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस महानिदेशक ने NAFIS फिंगरप्रिंट सिस्टम, E-साक्ष्य, E-समन, सीसीटीएनएस के अधिक उपयोग पर बल देते हुए अधिकारियों को इन तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस वेलफेयर से जुड़े मुद्दों पर भी समयसीमा में निर्णय सुनिश्चित करने की बात कही।

प्रेस विज्ञप्ति से मिली जानकारी के अनुसार, सकरी बटालियन, हाईकोर्ट व एयरपोर्ट सुरक्षा, रेडियो शाखा, अभियोजन कार्यालय, रेंज MT शाखा के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

पत्रकारों की अनदेखी बनी चर्चा का विषय

समीक्षा बैठक को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि DGP के आगमन और बैठक की सूचना स्थानीय पत्रकारों को नहीं दी गई। जबकि सामान्यतः बिलासपुर पुलिस के कार्यक्रमों में पत्रकारों को सूचित किया जाता है और उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित होती है। इस बार पत्रकारों को बैठक की जानकारी न देकर सीधे प्रेस विज्ञप्ति भेज दी गई, जो पत्रकारिता बिरादरी के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

पुलिस-पत्रकारों के बीच सहयोग और संवाद की भूमिका जहां लोकतंत्र और जवाबदेही को मजबूत करती है, वहीं, इस तरह की अनदेखी से विश्वास में कमी आ सकती है।

DGP का स्पष्ट संदेश – पुलिसिंग में पारदर्शिता, तत्परता और जिम्मेदारी हो प्राथमिकता

 पुलिस की विज्ञप्ति के अनुसार, अंत में डीजीपी गौतम ने अधिकारियों से कहा कि वे अपराध स्थल पर तत्परता से पहुंचे, फरियादियों की बात प्राथमिकता से सुनें और लंबित प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने सभी से समर्पण और अनुशासन के साथ कार्य करते हुए पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करने का आह्वान किया।

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