मुख्यमंत्री जी! बिलासपुर के खोंद्रा सर्किल के डिप्टी रेंजर नमित तिवारी ने DFO सत्यदेव शर्मा और रेंजर पल्लव नायक के संरक्षण में नियम विरुद्ध कटवाया पेड़, देखिए तस्वीरें

मुख्यमंत्री जी! नमित तिवारी मामले में लीपापोती करने वाले वन विभाग के अधिकारियों को भेजें जेल 

बिलासपुर: खोंद्रा सर्किल के डिप्टी रेंजर नमित तिवारी ने नियमों को दरकिनार करते हुए अपने क्षेत्र में नियम विरुद्ध पेड़ कटवाएं है जिसका सबूत इन तस्वीरों में साफ़ नजर आ रहा है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कटाई डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) सत्यदेव शर्मा की मौखिक अनुमति से की गई है, लेकिन आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

क्या है मामला?

आपको बता दें कि वन विभाग की विदोहन योजना का तात्पर्य उन योजनाओं से है जो जंगलों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों जैसे लकड़ी, बांस, गोंद, जड़ी-बूटियों, या अन्य वन उत्पादों के नियंत्रित और टिकाऊ दोहन के लिए बनाई जाती हैं। यह योजना पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए वनों के आर्थिक और सामाजिक लाभों को सुनिश्चित करती है। ये योजना भारत सरकार की है.   

 इस योजना में नियमानुसार पेड़ों की कटाई के लिए पहले लीगल रूप से कटाई हैमर  जारी किया जाता है, जिससे मार्क शुदा पेड़ों को काटा जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,पेड़ों की कटाई के लिए डिप्टी रेंजर नमित तिवारी को कटाई हैमर नहीं दिया गया है।  बावजूद इसके तिवारी ने पेड़ कटवा दिए. बिना हैमर की लिखित अनुमति के पेड़ों की कटाई नियमों का उल्लंघन मानी जाती है।

जांच के दायरे में कटाई का तरीका

सूत्रों ने बताया कि कटे हुए पेड़ों की स्थिति से स्पष्ट है कि यह प्रक्रिया मानकों के अनुसार नहीं की गई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इस तरह की कटाई आमतौर पर अवैध कटाई में देखने को मिलती है। यह दर्शाता है कि न तो पर्यावरणीय मानकों का ध्यान रखा गया और न ही सही प्रक्रिया का पालन किया गया।”

शिकायत और कार्रवाई की मांग

इस मामले को लेकर चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (CCF) प्रभात मिश्रा को शिकायत दी जा चुकी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कटाई से पर्यावरण को बड़ा नुकसान हो सकता है।

डीएफओ और रेंजर पर भी उठे सवाल

मामले में डीएफओ सत्यदेव शर्मा और रेंजर पल्लव नायक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है; क्योंकि कटाई मामले में मौखिक अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है.

क्या कहते हैं अधिकारी?

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। यदि यह साबित होता है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वन संरक्षण के लिए उठे सवाल

यह मामला वन संरक्षण और पर्यावरणीय कानूनों को लेकर गंभीर चिंताएं उठाता है। जहां एक ओर पर्यावरण सुरक्षा के लिए सरकार सख्त कानून बना रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के अधिकारियों पर ऐसे आरोप उनके कार्यों पर सवाल खड़े करते हैं।

निगरानी और कार्रवाई की जरूरत

वन संरक्षण से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह देखना बाकी है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस मामले को गंभीरता से लेते हुए क्या कदम उठाते हैं और दोषियों को सलाखों की पीछे डालते हैं।

 

अगले एपिसोड में होगा खुलासा  

– नमित तिवारी के और भी काले कारनामों का

वन विभाग के अधिकारी लेते हैं 30% से ऊपर कमीशन- सूत्र  

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