प्रशासनिक तानाशाही या कामचोरी? DFO नीरज का व्यवहार कटघरे में, ‘तेल लगाने वाले एक ठेकेदार’ पर मेहरबानी और जनसंवाद से दूरी बनी चर्चा का विषय

CCF और कलेक्टर से भी खुद को ‘बड़ा’ समझ रहे DFO नीरज! व्यस्तता का बहाना या जनसंवाद से भागने की जिद?

छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ’ खोलेगा DFO नीरज के खिलाफ मोर्चा, वन मंत्री से होगी शिकायत

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प्रशासनिक हलकों और वन विभाग में इन दिनों पद के घमंड और जनसंवाद से दूरी का एक नया मॉडल देखने को मिल रहा है। वन मंडल के डीएफओ (DFO) नीरज अपनी ‘अत्यधिक व्यस्तता’ का राग आलाप कर पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता से मिलने से कतरा रहे हैं। विभागीय गलियारों में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर डीएफओ नीरज इतने भी व्यस्त क्यों हैं, जबकि उनसे कहीं बड़े क्षेत्र और जिम्मेदारियों वाले उच्च अधिकारी जनता और मीडिया से संवाद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं?

CCF और कलेक्टर का उदाहरण: जिम्मेदारी बड़ी, पर व्यवहार संयमित

प्रशासनिक दक्षता का मापदंड इस बात से तय होता है कि अधिकारी कितना संवेदनशील और सुलभ है।

  • CCF का विस्तृत कार्यक्षेत्र: क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (CCF) का कार्यक्षेत्र DFO से कई गुना बड़ा होता है, लेकिन उन्होंने कभी अपनी व्यस्तता का ढोल नहीं पीटा। वे हर महत्वपूर्ण विषय पर मीडिया और आमजन को उचित और त्वरित रिस्पांस देते हैं।

  • कलेक्टर संजय कुमार अग्रवाल का आदर्श: जिले के मुखिया कलेक्टर संजय कुमार अग्रवाल के पास पूरे जिले की प्रशासनिक, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की अथाह जिम्मेदारी है। इसके बावजूद वे हर किसी की बात सुनते हैं और जनसमस्याओं पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब उच्चाधिकारी समय निकाल सकते हैं, तो DFO नीरज का ‘अत्यधिक व्यस्त’ होने का दावा क्या महज अपनी नाकामियों और रूखे व्यवहार को छिपाने का एक बहाना है?

अंदरूनी कलह: विभाग के कर्मचारी और अधिकारी भी प्रताड़ित

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, DFO नीरज के ‘रूखे और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार’ से केवल बाहर के लोग ही नहीं, बल्कि उनके अपने विभाग के अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारी भी बेहद त्रस्त हैं।

  • TL बैठकों से दूरी: जब से DFO नीरज ने पदभार ग्रहण किया है, वे समय-सीमा (TL) जैसी महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकों में खुद जाने के बजाय ज्यादातर एसडीओ (SDO) को भेजकर औपचारिकता पूरी कर देते हैं। इससे प्रशासनिक स्तर पर काम की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

तेल का पीपा लेकर घुमने वाला विवादित ठेकेदार पर मेहरबानी!

विभाग में चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा एक खास ठेकेदार के प्रति DFO की अप्रत्याशित मेहरबानी है।

सूत्रों का दावा: विभाग में काम करने वाले निष्पक्ष ठेकेदारों को दरकिनार कर, DFO को तेल लगाने  वाले एक खास ठेकेदार को सामग्री आपूर्ति (Material Supply) का बड़ा हिस्सा सौंपा जा रहा है।

यह वही ठेकेदार है जिसका पुराना रिकॉर्ड विवादों से घिरा रहा है। कानन पेंडारी जू में स्थित अधूरा निर्माण कार्य इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि कैसे घटिया और अधूरा काम करके सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। जानकारों का कहना है कि यदि कानन पेंडारी जू के इस अधूरे और विवादित निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच (Audit) करा दी जाए, तो कई जिम्मेदार अधिकारियों का सलाखों के पीछे जाना तय है।

‘छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ’ खोलेगा मोर्चा, वन मंत्री से होगी शिकायत

DFO के इस तानाशाही भरे रवैये, मीडिया से दूरी और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ ‘छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ’ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से दूरी बनाना और अपने चहेतों को उपकृत करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रदेश के वन मंत्री से मुलाकात कर DFO नीरज की कार्यशैली, विवादित ठेकेदार के साथ सांठ-गांठ और कानन पेंडारी जू के अधूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए मांग पत्र सौंपेगा।

बड़ा सवाल: क्या शासन-प्रशासन इस पूरे मामले में संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर DFO नीरज इसी तरह प्रशासनिक गरिमा को तार-तार करते रहेंगे?

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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