गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश

बिलासपुर: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के 11वें दीक्षांत समारोह में देश के उपराष्ट्रपति  जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उपाधि और गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए जीवन में साहस, विश्वास और नवाचार के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

बाबा गुरु घासीदास की शिक्षाओं को अपनाने की प्रेरणा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास समानता और एकता के प्रतीक थे। उन्होंने युवाओं से उनकी शिक्षाओं और संदेशों को जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ें।

85 मेडल और 122 शोधार्थियों को उपाधि प्रदान

सत्र 2022-23 और 2023-24 में प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 85 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इनमें 78 विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक, 09 दानदाता पदक, 01 गुरु घासीदास पदक, और 01 कुलाधिपति पदक शामिल हैं। इसके साथ ही, 122 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में रुद्राक्ष का पौधा लगाया

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने विश्वविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रुद्राक्ष का पौधा लगाकर वृक्षारोपण का संदेश दिया।

समावेशी विकास और सुशासन पर जोर

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी विकास भारत की परंपरा है। विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा और विकास की संभावनाओं की सराहना करते हुए युवाओं को रोजगार और नवाचार के अवसरों को पहचानने की प्रेरणा दी।

राज्यपाल रमेन डेका ने की विश्वविद्यालय की सराहना

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने शिक्षा और अनुसंधान में अद्वितीय प्रगति की है। उन्होंने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उनके वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास की शिक्षाओं को जीवन का मार्गदर्शक बताया।

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि इसने शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत किया। समारोह में उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

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