रायपुर। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) द्वारा प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर रोक को लेकर हाल ही में जारी निर्देशों ने एक बार फिर सरकार की मंशा और ज़मीनी कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूडा ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे स्वच्छता दीदियों के माध्यम से सिंगल यूज प्लास्टिक के वैकल्पिक उपयोग हेतु जागरूकता अभियान चलाएँ, व्यावसायिक क्षेत्रों, साप्ताहिक बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर जन-जागरूकता फैलाएँ, आर्थिक दंड सुनिश्चित करें, एनजीओ और रहवासी कल्याण संघों की सहभागिता से घर-घर अभियान चलाएँ तथा स्कूलों में चित्रकला प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक जैसे कार्यक्रम आयोजित करें।
लेकिन इन निर्देशों पर वन्यजीव प्रेमी एवं पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास कैंसर का इलाज पैरासिटामोल से करने जैसा है।
“निर्माण और आयात पर रोक बिना जागरूकता सिर्फ दिखावा”
नितिन सिंघवी का कहना है कि यदि प्रतिबंध वास्तव में प्रभावी बनाना है, तो उसका समाधान जागरूकता अभियानों में नहीं, बल्कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के निर्माण और दूसरे राज्यों से आयात पर सख्त रोक में है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून केवल आम नागरिकों पर लागू होगा और निर्माता व आयातक उसके दायरे से बाहर रहेंगे, तो यह कानून नहीं बल्कि एक दिखावटी कार्रवाई बनकर रह जाएगा।
सिंघवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सूडा के निर्देशों के पालन में शासन और जनता के धन की बर्बादी ही होगी, क्योंकि समस्या की जड़ को छुआ ही नहीं जा रहा।
2017 से लागू है प्रतिबंध, फिर आ कहां से रहा है प्लास्टिक?
उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में उनकी जनहित याचिका के बाद छत्तीसगढ़ में पहली बार सिंगल यूज प्लास्टिक पर विस्तृत प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे वर्ष 2023 में और सख्त किया गया। वर्तमान में 100 प्रतिशत प्लास्टिक एवं थर्माकोल से बने सिंगल यूज आइटम, नॉन-वूवन कैरी बैग सहित कई वस्तुएँ प्रतिबंधित हैं।
इसके बावजूद उन्होंने सवाल उठाया—
“जब प्रतिबंध है, तो रोज़ाना सैकड़ों ट्रक प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक छत्तीसगढ़ में आ कहां से रहे हैं?”
क्या बॉर्डर पर इन्हें रोका नहीं जा सकता?
प्रदेश में इनका निर्माण कहां हो रहा है और उसे रोकने के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई?
उन्होंने कहा कि निर्माताओं की बिजली खपत से भी अवैध निर्माण का आसानी से पता लगाया जा सकता है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
सिर्फ गंदगी नहीं, आने वाली बीमारियों की चेतावनी
सिंघवी ने चेताया कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक केवल स्वच्छता की समस्या नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
माइक्रोप्लास्टिक अब मिट्टी, जल और भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर चुका है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह मानव शरीर के फेफड़ों, रक्त, मस्तिष्क, वृषण, गर्भ में पल रहे भ्रूण और यहाँ तक कि महिलाओं के स्तन दूध तक में पाया गया है।
उन्होंने बताया कि नालियों में भरा सिंगल यूज प्लास्टिक मच्छरों के प्रजनन को बढ़ावा देता है, जिससे डेंगू जैसे मच्छर-जनित रोगों का खतरा बढ़ता है। जलवायु परिवर्तन के चलते यह खतरा और भी गंभीर होने वाला है।
“पत्र बना फुटबॉल, समाधान नदारद”
नितिन सिंघवी ने बताया कि वे अगस्त 2024 से लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रभावी रोक के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जो यह जांच करे कि प्लास्टिक कहां से आ रहा है और उसका निर्माण कहां हो रहा है।
लेकिन डेढ़ साल से उनका पत्र फुटबॉल की तरह एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूम रहा है, समाधान आज तक नहीं निकला।
उन्होंने दो टूक कहा—
“अगर आज सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती नहीं की गई, तो कल यही प्लास्टिक अस्पतालों को मरीजों से भर देगा।”















