बिलासपुर। ग्रामीण जीवन, संस्कृति और परंपरा से सीधा सरोकार रखने वाला बिलासा कला मंच एक बार फिर अपनी विशिष्ट पहचान के साथ सामने आया। मंच द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले एक दिवसीय ग्रामीण शिविर का आयोजन इस वर्ष मंच की स्थापना के 37वें वर्ष पर दूरस्थ ग्राम परसदा (बिल्हा) में किया गया। सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विख्यात इस ग्राम में कार्यक्रम ने ग्रामीण जीवन की आत्मा को जीवंत कर दिया।
ग्राम परसदा पहुंचने पर बिलासा कला मंच के सदस्यों का ग्रामीणजनों ने पुष्पवर्षा, कीर्तन-भजन और भव्य ग्राम भ्रमण के साथ आत्मीय स्वागत किया। भजन मंडली के साथ हुए इस सांस्कृतिक भ्रमण के पश्चात ग्राम मंच पर प्रसिद्ध रासलीला धारी डॉ. उग्रसेन कनौजे ने अपने साथियों के साथ रासलीला की संगीतमय और भावपूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर बिलासा कला मंच द्वारा ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों एवं कलाकारों का सम्मान स्मृति चिन्ह एवं गमछे से किया गया। इसके पश्चात आयोजित काव्यगोष्ठी में कवियों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं के सस्वर पाठ से ग्रामवासियों को रसाबोर कर दिया। काव्यगोष्ठी में सतीश पांडे, मनोहरदास मानिकपुरी, राजेंद्र मौर्य, केवलकृष्ण पाठक, भरत मस्तुरिया, केदार दुबे, रश्मि गुप्ता, आरती राय, डॉ. सोमनाथ मुखर्जी, डॉ. प्रदीप निरनेजक सहित अनेक कवियों ने सहभागिता निभाई।
सहभोज के उपरांत द्वितीय सत्र में बिलासा कला मंच की वार्षिक कार्यकारिणी (वर्ष 2026) का सर्वसम्मति से गठन किया गया।
संस्थापक डॉ. सोमनाथ यादव तथा संरक्षकद्वय चंद्रप्रकाश देवरस और राघवेंद्रधर दीवान की उपस्थिति में—
- अध्यक्ष: महेश श्रीवास
- संयोजक: रामेश्वर गुप्ता, यश मिश्रा
- सचिव: अश्विनी पांडेय
- कोषाध्यक्ष: अनूप श्रीवास
घोषित किए गए। शेष कार्यकारिणी की घोषणा जनवरी में आयोजित प्रथम बैठक में की जाएगी।
इस भव्य वार्षिक समारोह में मंच के वरिष्ठ सदस्य, साहित्यकार, कलाकार, जनप्रतिनिधि तथा ग्राम परसदा के बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण संस्कृति ही हमारी पहचान और देश की आत्मा है, जिसे बिलासा कला मंच निरंतर सहेजने का कार्य कर रहा है।















