चार भाषाओं में 40 कृतियों के सर्जक थे पं. पांडेय – डॉ. विनय कुमार पाठक
बिलासपुर। प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी एवं पंडित लोचन प्रसाद पांडेय जयंती समारोह समिति, बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य वाचस्पति पंडित लोचन प्रसाद पांडेय जी की जयंती के अवसर पर विचार एवं काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक (पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ गोपालगंज-बिहार) रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दुबे ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री रमेश चन्द्र श्रीवास्तव एवं श्री विष्णु कुमार तिवारी उपस्थित रहे।
स्वागत भाषण में डॉ. बजरंगबली शर्मा ने समिति की साहित्यिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए पं. लोचन प्रसाद पांडेय जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुराविद् एवं साहित्य वाचस्पति पंडित लोचन प्रसाद पांडेय बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अनेक पुरास्थलों का अन्वेषण किया तथा हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत और उड़िया – चार भाषाओं में लगभग 40 साहित्यिक कृतियों का सृजन किया। उनके द्वारा प्रशस्त किया गया पुरातात्विक शोध एवं साहित्य सृजन का मार्ग आज भी अनुकरणीय है।
डाॅ विवेक तिवारी ने कहा कि पं. पांडेय न केवल अंचल में प्राप्त पुरासामग्रियों का संरक्षण करते थे, बल्कि उनके पुरातात्विक महत्व को भी रेखांकित करते थे। सक्ती के समीप ऋषभ तीर्थ एवं ग्राम किरारी के काष्ठ स्तंभ का अन्वेषण उन्हीं के द्वारा किया गया।
विशिष्ट अतिथियों रमेश चन्द्र श्रीवास्तव एवं श्री विष्णु कुमार तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए पं. पांडेय जी के साहित्यिक एवं शोध कार्यों को प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी वंदना से हुआ, जिसकी प्रस्तुति राम निहोरा राजपूत ने दी। आभार प्रदर्शन श्री शीतल प्रसाद पाटनवार ने किया।
इस अवसर पर डॉ. अंकुर शुक्ला, राजेश सोनार, सनत तिवारी एवं डॉ. गजेन्द्र तिवारी सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने पं. लोचन प्रसाद पांडेय जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।















