बिलासपुर: 20 फरवरी को “शाम ए ग़ज़ल”: ग़ज़ल के साथ पंजाबी गीतों का अनोखा संगम

  • “शाम-ए-ग़ज़ल” में ग़ज़ल के साथ पंजाबी गीतों से गूंजेगा देवकीनंदन ऑडिटोरियम, एक यादगार शाम

  • “शाम-ए-ग़ज़ल” में ग़ज़ल के साथ पंजाबी गीतों की शानदार प्रस्तुति, संगीत की दुनिया का अनूठा अनुभव

  • “शाम-ए-ग़ज़ल” में पंजाबी गीतों के साथ ग़ज़ल प्रेमियों को मिलेगा नया अनुभव

  • “शाम-ए-ग़ज़ल”: पंजाबी गीतों और गज़लों का संगम, एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक शाम

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक कला संगम समिति द्वारा 20 फरवरी को देवकीनंदन ऑडिटोरियम में एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम “शाम-ए -ग़ज़ल” का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में उभरते कलाकारों द्वारा देशभर के प्रसिद्ध गजल गायकों जैसे आशा भोसले, गुलाम अली, भूपिंदर सिंह और चन्दन दास की गज़लों के साथ-साथ पंजाबी गीतों की भी शानदार प्रस्तुति दी जाएगी।

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कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व

“शाम-ए-ग़ज़ल” कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के संगीत प्रेमियों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहां वे भारतीय संगीत के विभिन्न रंगों का आनंद उठा सकें। ग़ज़ल और पंजाबी संगीत दोनों ही भारतीय संगीत की धरोहर हैं, जो अपनी विशेष शैली और भावनाओं के लिए जाने जाते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से, छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक कला संगम समिति ने संगीत की इस सुंदर विधा को आगे बढ़ाने और युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने का फैसला किया है।

ग़ज़ल, जो मुख्यतः दिल की गहराईयों से निकलने वाली भावनाओं को व्यक्त करती है, और पंजाबी गीत, जो अपनी जीवंतता और रंगीनता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं, दोनों ही श्रोताओं के लिए एक यादगार अनुभव बनाने का वादा करते हैं। इस कार्यक्रम में युवा कलाकार अपने गायन के माध्यम से इन महान गायकों के संगीत को जीवित रखेंगे।

उभरते कलाकारों का योगदान

कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें उभरते हुए कलाकार अपनी आवाज़ का जादू बिखेरेंगे। छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकार इस मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। 

विशेष प्रस्तुति: गजल और पंजाबी संगीत

आशा भोसले, गुलाम अली, भूपिंदर सिंह, पंकज उधास और चन्दन दास जैसे प्रसिद्ध गजल गायकों की गज़लें हमेशा से ही संगीत प्रेमियों के दिलों में बसी हुई हैं। इनकी गज़लें न केवल शायरी के सुंदर पहलू को उजागर करती हैं, बल्कि संगीत की जादूई दुनिया में भी एक अलग जगह बनाती हैं। इस कार्यक्रम में इन गायकों के मशहूर गज़ल प्रस्तुत किए जाएंगे, जो श्रोताओं को एक अविस्मरणीय अनुभव देंगे।

साथ ही, पंजाबी गीतों की प्रस्तुति भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा होगी। पंजाबी संगीत की लय और ऊर्जा का असर सभी पर देखने को मिलेगा। पंजाबी गीतों की ताजगी और जोश से श्रोताओं का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। यह प्रस्तुतियां दर्शकों को संगीत की एक नई दुनिया से परिचित कराएंगी।

समिति का संदेश और अपील

छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक कला संगम समिति के आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से वे लोगों को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने का एक बेहतरीन मौका प्रदान करना चाहते हैं। समिति ने इस आयोजन को संगीत प्रेमियों और स्थानीय कलाकारों के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

समिति ने दर्शकों से अपील की है कि वे इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बनें और भारतीय संगीत की इस शास्त्रीय यात्रा का आनंद लें। इस कार्यक्रम में संगीत, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जो सभी के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा।

“शाम-ए-ग़ज़ल” एक ऐसा आयोजन है, जो न केवल छत्तीसगढ़ के संगीत प्रेमियों के लिए बल्कि भारतीय संगीत के चाहने वालों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर है। इस कार्यक्रम के माध्यम से उभरते कलाकार अपनी कला को प्रस्तुत करेंगे, जबकि श्रोताओं को एक अनोखा और भावुक संगीत अनुभव मिलेगा। 20 फरवरी को देवकीनंदन ऑडिटोरियम में इस अद्भुत सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने का यह एक शानदार मौका है।

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