11 अगस्त से DEO कार्यालय के चक्कर काट रहे शिक्षक! बिलासपुर में तबादले के बाद जॉइनिंग अटकी, ‘4 लाख’ की चर्चा ने बढ़ाई हलचल

ट्रांसफर के नाम पर सभी शिक्षकों से वसूली? एक शिक्षक से 4 लाख लेने का दावा—सूत्र

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में हालिया शिक्षक तबादलों के बाद बिलासपुर जिले में कुछ शिक्षकों की जॉइनिंग को लेकर शिक्षा विभाग में असमंजस की स्थिति सामने आने की जानकारी मिल रही है। सूत्रों के अनुसार, तबादले के बाद DEO के विकल्प में बिलासपुर आए कुछ शिक्षक 11 अगस्त से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक संबंधित स्कूलों में कार्यभार ग्रहण कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

बताया जा रहा है कि परेशान शिक्षकों में महिला शिक्षकों की संख्या भी काफी है। उनका कहना है कि तबादला आदेश के बाद वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्कूल में योगदान देना चाहते हैं, लेकिन जॉइनिंग को लेकर उन्हें लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

रिटायरमेंट के पहले बड़ा फैसला लेने से बच रहे हैं अधिकारी?

बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक के इसी माह सेवानिवृत्त होने की जानकारी है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि जॉइनिंग से जुड़े इस मामले में निर्णय लेने को लेकर फिलहाल असमंजस बना हुआ है और अधिकारी किसी विवाद की स्थिति से बचना चाहते हैं।

हालांकि, इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी का अधिकृत पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए सूत्रों के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।

लेकिन सवाल जरूर उठता है कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया में किसी निर्णय की आवश्यकता है, तो अधिकारी के सेवानिवृत्त होने तक मामला लंबित रखना क्या उचित है? आखिर इसका असर उन शिक्षकों और संबंधित स्कूलों पर क्यों पड़े, जिनका तबादला शासन के आदेश के तहत हुआ है?

DEO कार्यालय में इंतजार, स्कूलों में व्यवस्था पर सवाल

शिक्षकों की जॉइनिंग में देरी केवल कर्मचारियों की परेशानी का विषय नहीं है। यदि शिक्षक निर्धारित समय पर स्कूल में योगदान नहीं कर पाते हैं तो इसका असर विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

ऐसे में शासन और शिक्षा विभाग के सामने सवाल है कि तबादले के बाद जॉइनिंग की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है?

‘4 लाख’ की चर्चा ने खड़े किए कई सवाल

इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू कुछ शिक्षकों के बीच कथित रूप से चल रही ‘4 लाख रुपये देकर तबादला कराने’ की चर्चा है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ शिक्षकों द्वारा इस तरह की बातें कही जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस कथित आर्थिक लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह स्पष्ट नहीं है कि कथित राशि किसे, कब, किस माध्यम से और किस उद्देश्य से दी गई।

यही वजह है कि यह चर्चा अब जांच का विषय बनती दिखाई दे रही है।

यदि यह केवल अफवाह है तो शिक्षा विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि किसी शिक्षक के पास इस संबंध में कोई प्रमाण या शिकायत है, तो उसे सक्षम जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

अब सवाल सिर्फ जॉइनिंग का नहीं, पारदर्शिता का है

तबादला प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं?
जॉइनिंग में देरी का वास्तविक कारण क्या है?
क्या सभी संबंधित शिक्षकों को लिखित रूप से स्थिति बताई गई है?
क्या किसी शिक्षक ने आर्थिक लेन-देन की कोई शिकायत की है?
और यदि ऐसी कोई शिकायत है तो उसकी जांच किस स्तर पर होगी?

इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

शासन चाहे तो रिकॉर्ड से खुल सकता है पूरा मामला

पूरे प्रकरण की पारदर्शिता के लिए तबादला आदेश, संबंधित शिक्षकों की पदस्थापना, जॉइनिंग से संबंधित पत्राचार, कार्यालयीन नोटशीट और सक्षम स्तर से जारी निर्देशों की जांच की जा सकती है।

वहीं, ‘4 लाख’ रुपये के कथित लेन-देन की चर्चा यदि किसी औपचारिक शिकायत या साक्ष्य पर आधारित है, तो उसकी स्वतंत्र जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है—

तबादला आदेश के बाद शिक्षक स्कूल में कब जॉइन करेंगे और 11 अगस्त से चल रही इस परेशानी का जिम्मेदार कौन है?

 

  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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