बिलासपुर के राजकिशोर नगर स्थित टेलीफोन एक्सचेंज रोड पर मंगलवार रात करीब 9 बजे हुई सनसनीखेज वारदात ने शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सराफा कारोबारी संतोष तिवारी को रास्ते में रोककर हथौड़ी और पिस्टल के बट से हमला किया गया, उनकी रेनॉल्ट कार (CG 10 AH 7707) लूट ली गई और आरोपी फरार हो गए। घायल व्यापारी को प्रथम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां हालत स्थिर बताई जा रही है।
वारदात का पैटर्न क्या कहता है?
-दुकान बंद कर घर लौटते व्यापारी को सुनसान मोड़ पर रोका गया।
– दो गाड़ियों में सवार हमलावरों ने पहले दरवाजा खोला, फिर सिर पर ताबड़तोड़ वार किए।
-जमीन पर पटककर कार लेकर फरार — यानी लूट + जानलेवा हमला।
– मौके से मैगजीन और 4 जिंदा कारतूस बरामद, हालांकि गोली नहीं चली।
एक पैशन प्रो (CG 10 P 0331) और एक कार (CG 10 BJ 8147) मौके पर छोड़कर भागे।
पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पहचान की कोशिश कर रही है, लेकिन अपराधियों का इस तरह हथियारों और कई वाहनों के साथ आना बताता है कि रेकी पहले से की गई थी।
पहले भी सराफा कारोबारियों पर हमले
यह पहली घटना नहीं है:
21 अगस्त 2022, गोंडपारा — दीपक ज्वेलर्स में नकाबपोशों ने कट्टा-चाकू दिखाकर लूट की कोशिश की, विरोध करने पर गोली चली।
25 जनवरी 20219, उसलापुर मुख्यमार्ग — सतीश्री ज्वैलर्स में हथियारबंद युवकों ने गन तानकर लूट की कोशिश की, फायरिंग में संचालक घायल।
तो क्या सराफा व्यवसायियों की सुरक्षा पर कोई स्थायी रणनीति नहीं बनी?
बरामदगी ने खोले कई राज
मौके से मैगजीन और जिंदा कारतूस मिलना बताता है कि आरोपियों के पास आर्म्स थे, चाहे इस्तेमाल न किए गए हों। इससे दो संकेत मिलते हैं:
1. डर का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना
2. स्थिति बिगड़ने पर फायरिंग की तैयारी
यह साधारण छीना-झपटी नहीं, बल्कि हाई-रिस्क, हाई-वैल्यू टारगेट ऑपरेशन लगता है।
बताया जा रहा है कि बैग में करीब ढाई किलो सोना और साढ़े तीन लाख रुपये नकद थे। अगर यह सच है तो सवाल उठता है —
क्या अपराधियों को पहले से मालूम था कि कारोबारी के पास भारी मात्रा में सोना-नकदी है?
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि —
जब शहर में आईजी कार्यालय मौजूद है, तो संगठित अपराध की ऐसी वारदातें क्यों दोहराई जा रही हैं?
क्या इंटेलिजेंस इनपुट कमजोर हैं?
क्या पेट्रोलिंग और हाई-वैल्यू व्यापारिक क्षेत्रों की सुरक्षा में कमी है?
क्राइम एनालिसिस: क्या बदलना होगा?
1. सराफा ज़ोन में स्पेशल पेट्रोलिंग
2. दुकान बंद होने के समय एस्कॉर्ट व्यवस्था
3. लाइसेंसी हथियार रखने वालों की नियमित मॉनिटरिंग
4. इंटर-डिस्ट्रिक्ट गैंग्स पर संयुक्त ऑपरेशन
5. सीसीटीवी नेटवर्क का रियल-टाइम इंटीग्रेशन
यह वारदात सिर्फ एक व्यापारी पर हमला नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती है।
यदि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं होती, तो अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा और व्यापारिक समुदाय में भय गहराएगा।
अब देखना यह है कि पुलिस की नाकेबंदी और तकनीकी जांच कितनी कारगर साबित होती है —
या फिर यह केस भी फाइलों में दबकर अगली वारदात का इंतजार करेगा?















