एसएसपी रजनेश सिंह जी, गौर कीजिए! बिलासपुर के कंपनी गार्डन में सुरक्षित नहीं महिलाएं; मनचलों की गंदी नीयत से सुबह की सैर बनी खौफ

‘क्या महिलाएं गार्डन आना छोड़ दें?’—पूछता है ‘न्यूज़ हब इनसाइट

कंपनी गार्डन में मनचलों का आतंक

बिलासपुर। किसी भी सभ्य समाज की पहचान इससे होती है कि उसकी महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर खुद को कितना सुरक्षित महसूस करती हैं। लेकिन बिलासपुर के प्रसिद्ध कंपनी गार्डन से सामने आई हालिया घटना ने इस सुरक्षा के दावों की कलई खोल कर रख दी है। सुबह की ताजी हवा और सेहत की उम्मीद में गार्डन आने वाली महिलाएं आज खौफ और असहजता के साये में टहलने को मजबूर हैं।

घटना बेहद गंभीर है। हाल ही में सुबह 8 से 10 बजे के बीच रोजाना की तरह वॉक करने पहुंची एक महिला का एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा पीछा किया गया। खुद को ‘शुक्ला’ बताने वाले इस शख्स ने न केवल जबरन बातचीत करने की कोशिश की, बल्कि जब महिला ने अपनी चाल तेज की, तो वह भी कदम से कदम मिलाकर चलने लगा। महिला की घबराहट और किसी तरह वहां से बचकर निकलने की हिम्मत काबिले-तारीफ है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर महिला को हर सुबह इस तरह के मानसिक तनाव से गुजरना पड़ेगा?

चौंकाने वाली बात यह है कि जब पीड़ित महिला ने अपनी दो अन्य सहेलियों से इस वाकये को साझा किया, तो पता चला कि वे भी ऐसी ही हरकतों का शिकार हो चुकी हैं। यानी यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक पैटर्न है—जहाँ गंदी नीयत रखने वाले तत्व बेखौफ होकर खुलेआम घूम रहे हैं।

उठते कुछ बुनियादी और कड़वे सवाल

क्या महिलाएं पार्क और गार्डन जाना बंद कर दें?

क्या सार्वजनिक स्थल सिर्फ मनचलों और असमाजिक तत्वों की जागीर बन चुके हैं?

क्या अपने ही शहर में सुबह की वॉक के लिए महिलाओं को सुरक्षा गार्ड्स या किसी सहारे की जरूरत पड़ेगी?

यदि महिलाएं डर के कारण गार्डन आना छोड़ देंगी, तो यह अपराधियों और मनचलों की जीत होगी और प्रशासन की नाकामी।

प्रशासन और पुलिस के लिए कड़ा संदेश

यह मामला केवल एक व्यक्ति ‘शुक्ला’ की ओछी हरकत का नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान और मौलिक अधिकार से जुड़ा है। पुलिस प्रशासन को तत्काल इस पर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।

1. सख्त से सख्त कार्रवाई: इस तरह के तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त धाराओं (और कानून के तहत उचित धाराओं) में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए—*महिला सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों का ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल है।

2. सघन गश्त और सादे कपड़ों में पुलिस तैनात हो: कंपनी गार्डन जैसे प्रमुख स्थलों पर सुबह और शाम के समय महिला पुलिसकर्मियों और सादे कपड़ों में पुलिस जवानों की तैनाती अति आवश्यक है।

3. सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था: गार्डन परिसर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाई जाए ताकि ऐसी मनचली हरकतों पर तुरंत लगाम लगाई जा सके।

महिलाओं में आत्म-विश्वास तभी लौटेगा जब वे पुलिस को अपने आसपास मुस्तैद देखेंगी। कानून का खौफ अपराधियों के दिल में होना चाहिए, न कि निर्भीक होकर जीने वाली महिलाओं के मन में। वक्त आ गया है कि बिलासपुर पुलिस इस मामले में नजीर पेश करे और यह साबित करे कि बेटियां और महिलाएं हर जगह पूरी तरह सुरक्षित हैं।

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  • पंकज खण्डेलवाल

    Pankaj Khandelwal is the Founder & Principal Editor of News Hub Insight (NHI). He is an independent journalist with expertise in governance, education, public policy, civic issues and investigative reporting. His reporting is based on accuracy, public interest and responsible journalism. Every article published under his editorial supervision follows News Hub Insight's Editorial Policy, Fact Check Policy and Correction Policy.

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